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टोडली मंदिर पर साद जी की बैठक

टोडली मंदिर पर साद जी की बैठक

टोडली की पहाडियों में आज भी गूंजते है संत लालदास के भजन

बाबा के जन्म, तपस्या और समाधि स्थल मेवात के लोगों को आज भी साम्प्रदायिक सदभाव की शिक्षा देते नजर आते है। संत लालदास की टोडली स्थित साद की बैठक आज भी बाबा के भजनों से गूंजती है। टोडली का बाबा लालदास मन्दिर वारिसपुर की गगन चुम्बी पहाडियों पर बसा है, जिसमें प्रकृति का मनोरम दृश्य बाबा के भक्तों को देखने को मिलता है।कहा जाता है कि संत लालदास की भेंट जब गदन चिश्ती से हुई तो उन्होने लालदास की दिव्य श्क्तियों को देख कर उन्हे राय दी कि आप सदगुण विचारों के बीज हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए बोने में सक्षम हो और ईश्वर ने इसी कार्य के लिए आपकों इस धराधाम पर भेजा है। इन्ही विचारों को सुन कर बाबा लालदास अपने जन्म स्थान धौली दूब को छोडकर रामगढ उपखण्ड के वारिसपुर की पहाडियों में स्थित टोडली में तपस्या करने आ गये और ईश्वर के  भजन ध्यान में लीन रहने लगे। बांन्धोली के पास स्थित छपरा गांव में एक परिवार के कपास के खेत में श्रम का कार्य भी संत लालदास द्वारा किया किया। संत लालदास टोडली की बैठक पर करीब 36 वर्षो तक रहे और भगवान का भजन ध्यान किया। संत लालदास द्वारा टोडली में तपस्या की गई थी इसलिए नंगला भूरिया सहित टोडली को भी बाबा की तपोस्थली के रूप में जाना जाता है। 

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